"परिंदे"
उड़ जाना है इन पंछीयों को
अनंत आकाश में दूर तक ,
सारा जहां घूम आना है
दिनभर में इनको पंखों के सहारे ,
लेकिन जानते है ये परिन्दे
कि सांझ ढलने से पहले ,
लौटकर भी आना है इनको
अपने बनाये छोटे से आशियाने में ,
हर रोज नापना है अपने पंखों से
आसमान की इन ऊंचाईयों को ,
इन नादान परिन्दों को
फिक्र नहीं होती अपने कल की ,
हर रोज निकल जाना है इनको
भोर की पहली किरण के साथ
हर रोज भरना है एक नयी उड़ान
इन पंछीयों को
जीने के लिए
मरने के लिए..
Very nice 😊
ReplyDeleteBhut khub ajad parinde 👌
ReplyDelete