"प्यार"
प्यार का दिखावा नहीं
प्यार सच में करता है,
मैं क्या कहूँ जनाब,
ये क्या क्या करता है,
सुबह की किरणों सा नहीं,
रात में चाँदनी भरता है,
मैं क्या कहूँ जनाब,
ये क्या क्या करता है,
फूलों सा महकता नहीं,
पर उन में रंग भरता है,
मैं क्या कहूँ जनाब,
ये क्या क्या करता है,
पंछियों की आवाज़ नहीं,
खुद पंछी बन उडता है,
मैं क्या कहूँ जनाब,
ये क्या क्या करता है,
राह में शामिल नहीं,
मंजिल पर मिलता है,
में क्या कहूँ जनाब,
ये मुझसे कितना प्यार करता है। ।
©परीक्षित
Nice bro.
ReplyDelete