Thursday, August 13, 2020

परिंदे

"परिंदे"

उड़ जाना है इन पंछीयों को 
अनंत आकाश में दूर तक ,
सारा जहां घूम आना है 
दिनभर में इनको पंखों के सहारे ,
लेकिन जानते है ये परिन्दे 
कि सांझ ढलने से पहले ,
लौटकर भी आना है इनको 
अपने बनाये छोटे से आशियाने में ,
हर रोज नापना है अपने पंखों से 
आसमान की इन ऊंचाईयों को ,
इन नादान परिन्दों को 
फिक्र नहीं होती अपने कल की ,
हर रोज निकल जाना है इनको 
भोर की पहली किरण के साथ 
हर रोज भरना है एक नयी उड़ान 
इन पंछीयों को 
जीने के लिए 
मरने के लिए..

©परीक्षित

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