Tuesday, August 25, 2020

कुछ पुरानी यादें

कुछ पुरानी य़ादे :-

वो पुरानी कॉपी....
सहेजे हुए है ना जाने राज़ कितने....
आखिरी पन्नो पर लिखे हुए कुछ नाम...
जिनका आज जीवन से कुछ वास्ता नही....,
सबकी अलग मंजिल अब एक रास्ता नही ...
वो कुछ पुराने खेल..... गाने की पंक्ती ...
जीवन तो उस कॉपी मे था अब अलग है ज़िन्दगी....

वो पुरानी किताब.... जिसमे आज भी रखा है गुलाब का वो सूखा हुआ फूल....
ये फूल भी अपनी एक अलग कहानी कहता है...
उडे हुए रंग....,सूखी बिखरी पंखुडियो की जुबानी कहता है....
ये आज भी बताता है कि मुझे इससे कितना प्यार था...
ये किसी की निशानी नही...बचपन से मेरी खुशियो का राजदार था....

वो छोटी सी गुडिया ....
शायद आज भी मेरा इंतजार करती होगी....
बहुत समय से उसे नए कपडे नहीं पहनाये....
उसका जन्मदिन नही मनाया ....
अब तो ना जाने घर के किस कोने मे पड़ी मेरी रह तकती होगी...
रोते हुए भी उसे देखकर मैं मुस्कुरा देता था....
उससे कितनी बाते किया करता था....
पता ही ना चला वो कब मुझसे अलग हो गई...
वो तो आज भी वैसी ही है ...शायद मैं ही बड़ा हो गया..

पुराने दोस्तो की भीड ना जाने कहाँ गुम हो गई...
अरे अभी तो सब यही थे ....लगता है शायद स्कूल की छुट्टी हो गई....
मेरे साथ लुका छिपी खेल रहे हो क्या... या फिर ये कोई मज़ाक है...
वापस तो आओ य़ारो अभी बाकी बहुत हिसाब है...

जानता हूँ ये य़ादे वापस नही आयेंगी....
पर कोई बात नहीं...इन य़ादो को याद करने का भी एक अलग ही मज़ा है...
पर इन य़ादो मे अपना समय नही गवाँउगा ...
लेकिन तुम लोगो को भी याद जरूर दिलाऊगा....
अभी तो बहुत ज़िन्दगी बाकी है... चलो और य़ादे बनाते हैं...
आगे की ज़िन्दगी के लिए थोडी और शैतानियाँ सजाते है ...

"लफ़्ज़ों के मोती"

~परीक्षित जायसवाल

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