Friday, August 14, 2020

लफ़्ज़ों के मोती

लफ़्ज़ों के मोती

लफ़्ज़ों के मोती पिरोना,
अच्छा लगता है।

अच्छा लगता है जब, 
ये गले में सजता है।

सजते हैं जज़्बात जब,
लफ्ज़ धड़कन बनते हैं।

बनतीं हैं और भी हसीन ये जब,
लब इन लफ़्ज़ों को छूते हैं।

छू लेते हैं दिलों को ये लफ्ज़ जब,
इन से यादें महकने लगती हैं।

महक उठता है तन बदन जब,
ये लफ्ज़ मीठा सा कुछ गुनगुनाते हैं।

©परीक्षित जायसवाल

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