Thursday, August 20, 2020

तुम उर्दू जैसी खूबसूरत

तुम उर्दू जैसी ख़ूबसूरत
मैं हिंदी जैसा सरल
मैं मनमोहन सिंह हूँ बस
तुम मोदी तुम अटल
मैं कम्युनिस्ट की क्रांति हूँ
तुम संघीय हो तुम दल
हम अलग-अलग पर एक से है
जैसे आज और कल
मैं काली चाय तुम कॉफी हो
मैं सर्टिफिकेट तुम ट्रॉफी हो
मैं रिजर्वेशन का धर्मा हूँ
तुम फेमिनिस्म की झांकी हो
मैं अनुराग कश्यप का हीरो तुम हीरोइन धर्मा की हो
मैं तो हर एक जैसा ही हूँ तुम अपनी एक तरह की हो
मैं लेफ्ट हूँ तुम राइट हो मैं हूँ लेनिन तुम फाइट हो
मैं गंगाधर हूं शक्तिमान तुम गौतम की डार्क नाईट हो
मैं पंचो का सरपंच हूँ तुम लन्दन की महारानी हो
मैं जलता फूंकता सूरज हूँ
तुम कल-कल बहता पानी हो
तुम मुझसे जलकर मुझको ढ़ककर 
बादल की होकर निकलती हो
तुम रंगो को धो देती हो
सागर संग मिलकर बहती हो
मैं फिर उगता हूँ फिर जलता हूँ और फिर से लौट जाता हूँ 
फिर किसी रात को किसी शायर की अतिश्योक्ति में आता हूँ
और हिंदी में लिखा जाता हूँ 
तुम उस शायर की महबूबा की
तारीफ़ों मे मिल जाती हो
और नज़्मों सी लिखी जाती हो
तुम उर्दू सी ख़ूबसूरत हो 
मैं हिंदी सा सरल ।।

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