Wednesday, August 12, 2020

तुम

"तुम"

शायर की शायरी,
लेखक की कहानी हो तुम..
संगीत के नग़्मे,
गजल की नज़्में हो तुम..
चकोर की चांदनी,
भोर की लालिमा हो तुम..
ज़िद का एक काफ़िला,
जिंदगी की एक जरूरी काफ़िया हो तुम...

उपवन की खुशबू तो, 
गंगा की पवित्र धरा हो तुम... 
मेरे अल्फ़ाज़ की तहरीरें हो, 
अधूरे इश्क़ की मुकम्मल दास्तां हो तुम... 

शाम की सुकून तो, 
भोर की अज़ान हो तुम.. 
ख़ुदा से बख्शीश में मिली कोई ज़कात हो तुम, 
मंदिर में रखी इबादत की थाल हो तुम.. 
मेरे एहसासों की हर्षमय संवाद हो तुम, 
अधूरे इश्क़ की मुकम्मल दास्तां हो तुम...

कवि की कविता, 
शायर की ग़ज़ल, 
मुक्तक का छंद हो तुम... 
कृष्ण की रुक्मणि तो, 
मर्यादा पुरुषोत्तम कि जानकी हो तुम..
अधूरे इश्क़ की मुकम्मल दास्तां हो तुम...

नर्सरी की नादानियां हो, 
जिंदगी की जिजीविषा हो तुम... 
जहन में उठते हंसी ख़्वाब से हो तुम, 
अधूरे इश्क़ की मुकम्मल दास्तां हो तुम... 

©परीक्षित जायसवाल

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